
कर्णप्रयाग : पहाड़ों में लगातार वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ती जा रही है । इन दिनों चमोली ज़िले के गैरसैंण ब्लॉक में भालू का आतंक फैला हुआ है । हाल ही में कर्णप्रयाग विधानसभा के ग्राम सभा जखेट के खेती गाँव में
भालू ने घात लगाकर 65 वर्षीय बरारी देवी पर हमला कर दिया जिसमें बरारी देवी घायल हो गईं जिसके बाद ग्रामीण उन्हें तुरंत निकटतम अस्पताल ले गए और उपचार के बाद उन्हें वापस घर भेज दिया गया । ग़ौरतलब है कि बरारी देवी ग़रीब परिवार से है और अब तक वन विभाग ने पीड़ित परिवार को मुआवज़ा भी नहीं दिया है । वहीं भलसौं के जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि दवेन्द्र नेगी ने बताया कि उनके क्षेत्र में बीते कुछ दिनों में कई बार भालुओं ने ग्रामीणों पर हमला किया है । उन्होंने कहा कि वन विभाग को वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस नीति पर काम करना होगा क्योंकि आए दिन पहाड़ों में जंगली जानवरों के साथ ग्रामीणों का संघर्ष होता है जिसमें कई दफ़ा ग्रामीणों को अपनी जान गवानी पड़ती है । इसके साथ ही उन्होंने कहा ग्रामीण परिवेश के अधिकतर लोग ग़रीब परिवारों से आते हैं और उनके साथ जब अप्रिय घटना घटती है तो वन विभाग समय पर मुआवज़ा नहीं देता है जिसके चलते कई दफ़ा इलाज न मिलने के अभाव में घायल व्यक्ति को जान गंवानी पड़तीं । अब सवाल ये कि आखिर कबतक पहाड़ की महिलाएँ भालू और गुलदार का शिकार होती रहेंगी.. उत्तराखंड सरकार और वनविभाग के पास वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ रोकने के लिए क्या नीति है ?