उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन फिर तेज, 24 अगस्त के आश्वासन पर अमल न होने का आरोप
देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव द्वारा 24 अगस्त को छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया था। उस दौरान छात्रों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांगों पर 10 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद किसी भी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
छात्रों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद मांगें पूरी न होने के कारण उन्हें दोबारा विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। छात्रों के अनुसार, आंदोलन के दौरान अब तक विश्वविद्यालय का कोई भी उच्च अधिकारी उनसे वार्ता करने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा है, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि 24 अगस्त को उप जिलाधिकारी अपूर्वा जी, तहसीलदार, थाना प्रभारी हर्रावाला, सर्किल ऑफिसर, NSUI के प्रतिनिधियों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया था। छात्रों का कहना है कि उस दौरान मीडिया के सामने भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से समाधान चाहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंच रहा है।
छात्रों ने मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल तक पहुंचाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
छात्रों ने सभी मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर सरकार और शासन तक पहुंचाने का कष्ट करें, ताकि छात्र हित में जल्द से जल्द उचित निर्णय लिया जा सके।