
देहरादून, 1 जनवरी 2024: उत्तराखंड क्रांति दल ने आज देहरादून में मूल निवास 1950 और सशक्त भू कानून की मांग को लेकर धरना किया। इस धरने में दल के संरक्षक ए पी जुयाल, केंद्रीय महामंत्री विजय बौड़ाई, केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रमीला रावत, युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बिष्ट, सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह गाड़िया, महानगर अध्यक्ष विजेंद्र रावत, केंद्रीय कोषाध्यक्ष प्रताप कुंवर, मुख्य प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
धरने को संबोधित करते हुए ए पी जुयाल ने कहा कि उत्तराखंड में 2000 से पूर्व मूल निवास प्रमाण पत्र मिलता था, लेकिन 2001 के बाद नई सरकार द्वारा नई निवास प्रमाण पत्र की व्यवस्था बनाकर यहां पर स्थाई निवास प्रमाण पत्र दिया जाने लगा। इस व्यवस्था से बाहर से आने वाले लोगों तथा मूल निवासियों को एक ही श्रेणी में रखा गया, जिससे मूल निवासियों के हक में होने वाली नौकरियां एवं अन्य योजनाओं का लाभ राज्य से बाहर के लोग उठाने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि मूल निवासियों की कई पीढ़ियां यहां निवास कर करती आ रही हैं, इसके बाद भी उन्हें मूल निवास नहीं मिल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों को अपना अधिकार नहीं मिल रहा है। अपने ही राज्य में पहचान का संकट खड़ा हो गया है।
प्रमीला रावत ने कहा कि मूल निवासियों को रोजगार, शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक उद्योगों तथा राज्य की सभी योजनाओं एवं नीतियों का लाभ मिल सके इसलिए मूल निवास 1950 लागू किया जाना अति आवश्यक है।
राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि देश के संविधान लागू होने के साथ वर्ष 1950 में जो व्यक्ति जिस राज्य का निवासी था, वो उसी राज्य का मूल निवासी होगा। इसलिए संविधान प्रदत्त अधिकार के कारण एवम जन भावना अनुरूप उत्तराखंड राज्य में मूल निवास 1950 लागू किया जाना आवश्यक है।
चंद्रमोहन सिंह गाड़िया ने कहा कि उत्तराखंड में सशक्त भू कानून लागू किया जाने के लिए राज्य बनने से ही मांग की जाती रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने कानून नहीं बनाया। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
विजेंद्र रावत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपने राज्य बनने के बाद एक वर्ष में अपना सशक्त भू कानून बना दिया था। कोई भी हिमालयी राज्य ऐसा नहीं है जिसमे बाहरी व्यक्ति जमीन खरीद सकता हो, लेकिन उत्तराखंड में सभी को भूमि खरीदने की खुली छूट दे दी गई है।
प्रताप कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जहां राज्य के बाहर के लोग पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि भूमि गैर कृषि भूमि के लिए खरीद सकते हैं। लेकिन यहां की सरकार ने जो कानून बनाया भी था, वह भी हटा दिया तथा बाहरी लोगों को खुली छूट दे दी, जिसे यहां के लोगों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।
शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि अपने राज्य की पहचान, परंपरा, संस्कृति एवं अस्मिता बचाने, लोगों की भूमि को बाहरी लोगों से बचाने के लिए तथा पूंजीपतियों के चुंगल से अपनी भूमि को सुरक्षित करने के लिए एक सशक्त भू कानून बनाया जाना अति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल सरकार से मांग करता है कि संपूर्ण उत्तराखंड के जनमानस के हित में तथा उत्तराखंडियत को बचाने के लिए उत्तराखंड में मूल निवास 1950 एवं सशक्त भू कानून शीघ्र लागू करे, अन्यथा उक्रांद इन मुद्दों को लेकर गांव से लेकर राजधानी तक जन आंदोलन करेगा।
धरने में शामिल अन्य नेताओं ने भी मूल निवास 1950 और सशक्त भू कानून की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का संकल्प लिया।




