
झारखंड में सियासी उथलपुथल के बीच शुक्रवार को चंपई सोरेन ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। इससे पहले इसी हफ्ते पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया था।
राज्यपाल रमेश बैस ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में चंपई सोरेन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालते ही राज्य के कल्याण और विकास के लिए काम करने का संकल्प लिया। उनके साथ कांग्रेस के आलमगीर आलम और राष्ट्रीय जनता दल के सत्यानंद भोगता ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चंपई सोरेन को अपना नेता चुना था। चंपई सोरेन राज्य में दिग्गज आदिवासी नेता शिबू सोरेन के छोटे भाई हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश है। वहीं, विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है।
अब चंपई सोरेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 10 दिनों के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करना है। उनकी पार्टी JMM के पास विधानसभा में 30 सीटें हैं, जबकि गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस के पास 18 और RJD के पास 1 सीट है। बहुमत के लिए उन्हें कम से कम 41 सीटों की जरूरत है। ऐसे में विपक्षी दलों द्वारा विधायकों के टूटने की आशंका जताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजरें बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में और क्या उथलपुथल होती है, यह देखना दिलचस्प होगा।




