उत्तर प्रदेश में होली के पर्व से पहले तनाव की स्थिति बन गई है। कुछ इलाकों में जुलूस के मार्गों पर स्थित मस्जिदों को ढका जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि होली के जुलूस के दौरान रंग या कोई अन्य आपत्तिजनक चीज मस्जिदों पर न फेंकी जाए और सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।

संवेदनशील इलाकों में एहतियाती कदम
यह खास व्यवस्था उन इलाकों में की जा रही है जहां होली के जुलूस पारंपरिक रूप से निकाले जाते हैं और इन जुलूसों के मार्ग में मस्जिदें भी आती हैं। प्रशासन का कहना है कि यह एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना ना हो।
विवादित परंपरा?
हालांकि, इस कदम की कुछ लोगों द्वारा आलोचना भी की जा रही है। उनका कहना है कि इससे सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश नहीं जाता बल्कि उल्टा एक तनाव की स्थिति पैदा होती है। उनका मानना है कि प्रशासन को जुलूसों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी चाहिए ना कि मस्जिदों को ढका जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में जूता मार होली के जुलूस के मार्ग में आने वाली करीब 40 मस्जिदों को प्लास्टिक की शीटों से ढका जा रहा है। जूता मार होली यहां की एक सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें लोग एक तांगे पर बैठे हुए लाट साहब का प्रतिरूप बनाए गए व्यक्ति पर जूते फेंकते हैं। इस जुलूस के रास्ते में कई मस्जिदें आती हैं, जिसको देखते हुए प्रशासन ने यह एहतियाती कदम उठाया है।
शांतिपूर्ण तरीके से हो Holi का जश्न
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि होली रंगों का त्योहार है और इसका असली मर्म भाईचारा और सद्भाव है। हमें अपने त्योहारों को इस तरह मनाना चाहिए कि सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और किसी की आस्था को ठेस न पहुंचे। उम्मीद की जाती है कि प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से शांतिपूर्ण तरीके से होली का पर्व मनाया जाएगा।




