
यू तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेताओं को आपने कई दफ़ा मंच से कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देते हुए देखा होगा लेकिन महाराष्ट्र के अंबरनाथ और अकोला के स्थानीय निकाय चुनावों में कुछ ऐसा देखने को मिला की महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया ।
दरअसल महाराष्ट्र के अंबरनाथ और अकोला के स्थानीय चुनावों में भाजपा के स्थानीय नेताओं ने सत्ता पर क़ाबिज़ होने और शिवसेना शिंदे गुट को हराने के लिए कांग्रेस और AIMIM से गठबंधन कर लिया जिसके बाद राजनीतिक गलियारों का बाज़ार चर्चा से गरम है ।
हालाँकि चारों तरफ़ भद्द पिटने के बाद कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को सस्पेंड कर दिया है और साथ ही स्थानीय इकाई को भी भंग कर दिया है यह कार्रवाई उन पर भाजपा से गठबंधन करने की दिशा में की गई है जबकि अंबरनाथ से जीते हुए 12 कांग्रेसी पार्षदों को भी कांग्रेस ने सस्पेंड कर दिया है ।
फैसले पर सीएम फड़नवीस ने भी आपत्ति जताई थी
कांग्रेस और AIMIM से गठबंधन पर महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फड़नवीस ने पहले ही नाराज़गी जतायी थी और अब उन्होंने कहा है कि मैं यह स्पष्ट कर दूँ कांग्रेस और AIMIM से गठबंधन से गठबंधन किसी रूप में भी स्वीकार्य नहीं होगा और जिस भी स्थानीय नेताओं ने अपनी मर्ज़ी से पार्टी लाइन के विपरीत जाकर गठबंधन किया है जो अनुशासन के विरुद्ध है और उस पर कार्रवाई की जाएगी और ऐसे गठबंधन को रद्द करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं ।
क्या बन थे अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता के लिए समीकरण
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं जिसके लिए 20 दिसंबर को मतदान हुए और फिर 21 दिसंबर को मतगणना हुई जिसमें 27 सीटों के साथ शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जो की बहुमत से सिर्फ़ चार सीट कम थी वहीं भाजपा ने 15,कांग्रेस को एक सीट 12,एनसीपी को 4 जिससे 31 सीटों के साथ नए गठबंधन को अंबरनाथ विकास अगाड़ी नाम दिया गया जो बहुमत के आंकड़े 30 सीट से एक अधिक थी । वहीं शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट ने इस गठबंधन पर नाराज़गी जताते हुए विश्वासघात बताया । हालाकि कांग्रेस के सस्पेंशन की कारवाई के बाद यह गठबंधन एक दिन से ज़्यादा भी नहीं टिक पाया ।

