Tuesday, March 31, 2026
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देहरादून: देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज की भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ा जनसैलाब

देहरादून। राजधानी के रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने भक्ति और ज्ञान की अविरल धारा प्रवाहित की। कथा के दौरान महाराज जी ने जीवन की सफलता, संस्कारों की महत्ता और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मर्म समझाते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सफलता का आधार: धन नहीं, संस्कार और माता-पिता का सम्मान
महाराज जी ने कहा कि आधुनिक युग में सफलता को केवल धन और प्रसिद्धि से मापा जाता है, जो कि गलत है। वास्तविक सफलता अच्छे संस्कार और सही निर्णयों में निहित है। उन्होंने जोर देकर कहा:

“माता-पिता हमारे प्रथम गुरु हैं। उनके अनुभव मार्गदर्शक दीपक की तरह हैं। जो बच्चा अपने माता-पिता की सीख को मानकर चलता है, उसे जीवन के कठिन मार्ग पर कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता।”

सत्संग और विवेक का महत्व
कथा के दौरान विवेक और बुद्धि के अंतर को स्पष्ट करते हुए महाराज जी ने बताया कि बिना सत्संग के मनुष्य बुद्धिमान तो हो सकता है, लेकिन विवेकमान नहीं। उन्होंने कहा कि विवेकमान व्यक्ति न किसी का बुरा करता है और न होने देता है। साथ ही, उन्होंने सनातन संस्कृति के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि जब तक अभिभावक स्वयं वेदों और संस्कृति को नहीं समझेंगे, तब तक नई पीढ़ी को इसे समझाना संभव नहीं होगा।
भगवान भाव के भूखे हैं: पूतना उद्धार का प्रसंग
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए महाराज जी ने पूतना उद्धार के प्रसंग को विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि पूतना भगवान को विष पिलाने आई थी, फिर भी प्रभु ने उसे माँ की गति प्रदान कर उसका उद्धार किया। यह सिद्ध करता है कि परमात्मा केवल अपराध नहीं, बल्कि जीव के भाव देखते हैं। उन्होंने भक्तों को सीख दी कि ईश्वर के सम्मुख कभी भी छल-कपट या दिखावे के साथ नहीं, बल्कि निष्कपट हृदय से जाना चाहिए।
विवाह संस्कार पर विशेष चर्चा
विवाह की पवित्रता पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने सुझाव दिया कि सनातन परंपरा के अनुसार विवाह हमेशा गोधूलि वेला या दिन के समय करना अत्यंत शुभ होता है, क्योंकि दिन का प्रकाश सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक है।
प्रमुख उपस्थिति एवं आयोजन व्यवस्था
कथा के पांचवें दिन विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने विशेष रूप से पहुंचकर कथा का श्रवण किया और आशीर्वाद लिया।
इस भव्य आयोजन का कुशल संचालन और व्यवस्थापन सीमा शर्मा, सुनील शर्मा, संदीप रस्तोगी एवं शिल्पी रस्तोगी द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि कथा में भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कार्यक्रम विवरण:

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