देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना के निर्देश पर आयोग की टीम ने देहरादून के प्रेमनगर स्थित खैरी गांव में संचालित ‘मेडिकल एम्बेसडर’ नाम के एक संदिग्ध संस्थान पर छापेमारी की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संस्थान बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सेवा के नाम पर लोगों को एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर आकर्षित करने और धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था।
आयोग को निरीक्षण के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, रजिस्टर, प्रचार सामग्री और पोस्टर मिले हैं। इसके अलावा, दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की मदद के बहाने विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहायता जुटाने और प्रलोभन देकर धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने के संकेत भी मिले हैं। संस्थान के परिसर में मणिपुर का एक चालक और पौड़ी का एक परिवार पिछले कई वर्षों से रह रहा था। दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि इस संस्थान के तार कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से जुड़े हो सकते हैं और इसे विदेशी फंडिंग (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता) भी मिल रही थी। आशंका है कि यह नेटवर्क अन्य राज्यों में भी सक्रिय है।
आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की मासूमियत, शिक्षा या दिव्यांगता का इस्तेमाल किसी छिपे हुए धार्मिक एजेंडे के लिए करना बेहद गंभीर मामला है। चूंकि मामले के कई पहलू आयोग के सीधे अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं, इसलिए विधिक प्रक्रिया के तहत सभी दस्तावेज और फाइलें पुलिस प्रशासन को सौंप दी गई हैं ताकि आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके। इस पूरी कार्रवाई के दौरान आयोग के सचिव एस.के. बर्नवाल भी मौजूद रहे।


