दून मेडिकल कॉलेज की संवेदनहीनताः कार्ड होने के बावजूद इलाज ठप, घायल युवक घंटों बेसहारा

उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) देहरादून से एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। 29 अगस्त को हरिद्वार जनपद के कलियर थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए एक अज्ञात युवक को पुलिस सहायता से निजी एम्बुलेंस (यूके08 पीए 1799) के जरिए शाम 6:07 बजे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचाया गया। सिर की गंभीर चोट के साथ बेहोश अवस्था में लाए गए इस मरीज के पास आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने केवल राशन कार्ड न होने का हवाला देते हुए इलाज शुरू करने से इनकार कर दिया। घंटों तक सिर्फ प्राथमिक ड्रेसिंग के अलावा कोई ठोस चिकित्सा सहायता नहीं दी गई।
परिजनों के लगातार चक्कर काटने और भारी दबाव के बाद 30 अगस्त की शाम करीब 6 बजे भर्ती की फाइल तो बनी, लेकिन पैसों और कागजी अड़चनों के चलते इलाज अभी भी शुरू नहीं हो सका। पुलिस द्वारा लाए गए इस एक्सीडेंटल केस में आयुष्मान भारत योजना का लाभ तो दूर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) की ‘हिट एंड रन’ या आपातकालीन चिकित्सा योजनाओं का भी कोई असर नहीं दिखा। अस्पताल प्रशासन की कथित संवेदनहीनता और कागजी खानापूर्ति के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजन दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
यह मामला प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बड़े सवाल स्वास्थ्य मंत्री से हैं—क्या सिर्फ अस्पतालों के बाथरूम का निरीक्षण करने से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरेगी? जब राजधानी में प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज और उसके कर्मचारियों का हाल यह है, तो बाकी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
