
देहरादून। उत्तराखंड में भर्तियों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने प्रदेश के होम्योपैथी चिकित्सा विभाग और होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में धांधली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने विभाग में नियुक्तियों से लेकर वित्तीय प्रबंधन तक में हुए गंभीर घोटालों का दस्तावेजों के साथ पर्दाफाश किया।
सेमवाल ने कहा कि 24 पदों पर हुई होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। आरोप है कि हिमाचल प्रदेश की एक अनुसूचित जाति की महिला अभ्यर्थी को उत्तराखंड के आरक्षित कोटे का लाभ देकर नियुक्त किया गया साथ ही मूल विज्ञप्ति में ओबीसी (OBC) श्रेणी का कोई पद नहीं था, लेकिन अंतिम परिणाम में इस कोटे से नियुक्तियां कर दी गईं जबकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि 60 अंकों का भारी-भरकम इंटरव्यू रखा गया, जिसकी कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। सेमवाल ने कहा नियमानुसार चयन समिति में उच्च शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ होने चाहिए थे, लेकिन विधानसभा में तैनात एक मेडिकल अफसर को इंटरव्यू लेने के लिए बुलाकर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और दावा किया कि चयनित होने वाले अधिकांश अभ्यर्थी रसूखदार विधायकों और विभाग के उच्चाधिकारियों के सगे-संबंधी हैं।
सेमवाल ने होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. शैलेंद्र पांडे को इस भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है कहा डॉ. पांडे पिछले 12 वर्षों से रजिस्ट्रार के पद पर ‘अटैच’ हैं, जबकि इस पद के लिए अब तक कोई नियमावली ही नहीं बनी है और वे बिना कोई चिकित्सकीय कार्य किए वर्षों से नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) ले रहे हैं, जो सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।


