
भारतीय सरकार ने आज अपना वार्षिक बजट 2024-25 पेश किया, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास और कर क्षेत्र में सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि यह बजट “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बुनियादी ढांचे पर जोर:
- सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश शामिल है।
- सड़क परिवहन मंत्रालय को आवंटित बजट में 20% की वृद्धि की गई है, जबकि रेलवे के लिए आवंटन में 15% की वृद्धि की गई है।
कर सुधार:
- सरकार ने करदाताओं को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इसमें व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कुछ बदलाव और कर छूट की सीमा बढ़ाना शामिल है।
- इसके अलावा, सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए कर प्रोत्साहन की भी घोषणा की है।
अन्य मुख्य विशेषताएं:
- सरकार ने कृषि क्षेत्र पर भी ध्यान दिया है और कृषि ऋणों पर ब्याज सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है।
- सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में भी वृद्धि की है।
प्रतिक्रियाएं:
बजट को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक सुधारों को गति देगा, जबकि अन्य का कहना है कि यह ग्रामीण और गरीब लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है।
आगे क्या?
बजट के पारित होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का पता चल सकेगा। हालांकि, यह स्पष्ट है कि सरकार बुनियादी ढांचे के विकास और कर सुधारों को प्राथमिकता दे रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये उपाय भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं।




