राज्य में शिक्षकों की गंभीर कमी के सामने, डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं ने अपनी आवाज को बुलंद किया है। गत 2020 से कोई भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, जबकि लगभग 4000 सहायक अध्यापकों की पदों पर रिक्तियां हैं। इस स्थिति में राज्य के नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में लटका हुआ है .

डीएलएड प्रशिक्षित युवा, जो अपना द्विवर्षीय प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं, विभिन्न जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थाओं से निकलकर प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं। इन युवाओं ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पिछले 6-7 महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन किया है, लेकिन भर्ती की घोषणा अब तक नहीं हुई है।
अब, यह प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि अगर भर्ती की घोषणा तुरंत नहीं होती है, तो उन्हें फिर से आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। यहां यह भी दिलचस्प है कि निर्वाचन आयोग ने भी शिक्षक भर्ती हेतु अनुमति प्रदान की है, लेकिन अभी तक भर्ती की कोई योजना नहीं बनाई गई है।
उत्तराखंड डायट डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के सदस्यों ने भी विभाग को चेताया है कि अगर शिक्षक भर्ती में देरी होती है, तो उन्हें उग्र आंदोलन का सहारा लेना पड़ सकता है। यह समय है कि सरकारी अधिकारियों को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ताकि राज्य के नौनिहालों का भविष्य सुनिश्चित हो सके।

