विश्व पटल पर भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व को मिली नई पहचान, शिवकृपानंद स्वामी को मिली अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

उत्तराखंड दौरे पर पहुँचे हिमालयन समर्पण ध्यान के संस्थापक शिवकृपानंद स्वामी, प्रमुख पत्रकारों से की विशेष चर्चा; मानसिक तनाव से मुक्ति और आंतरिक शांति का दिया संदेश
देहरादून। आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ के बीच बढ़ते मानसिक तनाव तथा अशांति के दौर में ध्यान और अध्यात्म का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी विषय को लेकर दुनियाभर में पहचान रखने वाले भारतीय आध्यात्मिक गुरु और ‘हिमालयन समर्पण ध्यान’ के संस्थापक शिवकृपानंद स्वामी उत्तराखंड दौरे पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पत्रकारों से मुलाकात कर ध्यान, अध्यात्म, मानसिक मजबूती और आंतरिक शांति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
पत्रकारों के साथ हुई इस विशेष बातचीत में आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों, मानसिक तनाव, एकाग्रता और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने को लेकर कई सवाल पूछे गए। स्वामी ने बेहद सरल और सहज अंदाज में पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बताया कि ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर शांति और मानसिक संतुलन विकसित कर सकता है।
विश्व मंच पर भारत का बढ़ा आध्यात्मिक प्रतिनिधित्व
शिवकृपानंद स्वामी को हाल ही में ‘विश्व ध्यान दिवस संचालन समिति’ का उपाध्यक्ष और दक्षिण एशिया क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह नियुक्ति ‘विश्व ध्यान दिवस संघ’ और ‘विश्व ध्यान फाउंडेशन’ के बीच हुए संयुक्त समझौते के तहत औपचारिक रूप से घोषित की गई है।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वामी भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इस समिति में लीटेंस्टीन का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकारी अध्यक्ष एनरिको सोम्मा सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी शामिल हैं।
यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब दुनियाभर में मानसिक तनाव, आपसी संघर्ष और जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों के बीच ध्यान और आंतरिक शांति की प्रासंगिकता पर चर्चा बढ़ रही है।
‘विश्व शांति हथियारों से नहीं, आंतरिक शांति से आएगी’
अपने संदेश में शिवकृपानंद स्वामी ने कहा कि विश्व शांति किसी पुस्तक या हथियार से नहीं आ सकती। विश्व शांति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर की शांति से होती है। जब व्यक्ति स्वयं शांत होगा, तभी समाज और दुनिया में शांति का वातावरण विकसित हो सकेगा।
उन्होंने ध्यान को केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और मानसिक मजबूती लाने का माध्यम बताया।
उत्तराखंड से वैश्विक शांति का संदेश
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद विश्व स्तर पर भारतीय योग और ध्यान परंपराओं की स्वीकार्यता बढ़ने के बीच शिवकृपानंद स्वामी की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी को भारत की आध्यात्मिक परंपरा के वैश्विक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तराखंड के पत्रकारों के साथ हुई उनकी यह चर्चा आधुनिक जीवन में ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य और आंतरिक संतुलन की आवश्यकता को सामने लाती है। स्वामी का संदेश स्पष्ट है कि बाहरी दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए सबसे पहले मनुष्य को अपने भीतर शांति स्थापित करनी होगी।


