उत्तराखंड में भू-कानून: मूल निवासी की परिभाषा पर उठे सवाल

देहरादून, 10 अक्टूबर: उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मूल निवासी भू कानून समन्वय सँघर्ष समिति के सह संयोजक लूशुन टोडरिया ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया बयान को जनता को गुमराह करने वाला बताया है।

मुख्यमंत्री ने 2018 के बाद बाहरी लोगों द्वारा उत्तराखंड में अधिक जमीन खरीदे जाने की जांच कराने की बात कही थी। इस पर टोडरिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर बाहरी व्यक्तियों की जमीन खरीद-फरोख्त की जांच की बात कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर वह बाहरी व्यक्तियों की परिभाषा स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2018 के पहले भी कई गैर-मूल निवासियों ने उत्तराखंड में बड़े स्तर पर जमीन खरीदी थी, क्या वे लोग भी जांच के दायरे में आएंगे?

टोडरिया ने मांग की है कि सरकार को भू-कानून और मूल निवासी के मुद्दे पर जनता के सामने अपना स्पष्ट मत रखना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो जनता पूरे प्रदेश से लाखों की संख्या में आंदोलन में उतरने को मजबूर हो जाएगी।

टोडरिया ने कहा कि हरिद्वार में हरियाणा से आए व्यक्ति को भाजपा से विधानसभा का टिकट मिलना इस बात का प्रमाण है कि राज्य के मूल निवासियों को हाशिये पर डालने की साजिशें शुरू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा या अन्य राज्यों के निवासी यहां विधायक बनेंगे तो वे, उनके परिजन और समर्थक उत्तराखंड की जमीन भी खरीद और बेच सकेंगे। इसलिए सबसे पहले जरूरी है कि मूल निवास 1950 लागू किया जाए, तभी बाहरी और स्थानीय तय होंगे।

टोडरिया ने मांग की है कि उत्तराखंड में तत्काल प्रभाव से मूल निवास 1950 लागू किया जाए और बाहरी लोगों द्वारा जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जाए।

यह खबर उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर चल रहे विवाद को दर्शाती है। मूल निवासी संगठन सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं और बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदे जाने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

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